Category Archives: Cricket

Lord of the Lords- Part 2

Dilip Vengsarkar
Dilip Vengsarkar

३६ साल हुए आज, १९८२ का लॉर्ड्स टेस्ट. भारत बनाम इंग्लैंड. किस्सा १९७९ से कुछ ख़ास अलग नहीं था. भारत ३०५ रनों से पिछड़ा हुआ, फॉलो ऑन कर रहा था. सुशील दोशी के शब्द उधार लेकर कहूँ, तो “भारत अब इस पारी की शुरुआत से ही पराजय की कगार पर” था. सलामी बल्लेबाजों में भी सुनील गावस्कर के साथ भरोसेमंद चेतन चौहान नहीं थे. गावस्कर के साथ उतरे थे गुलाम परकार. मैं ग्यारह साल की उम्र में कान में ट्रांजिस्टर को ठूसे हुए मैच का आँखों देखा हाल सुन रहा था. टेस्ट के चौथे दिन की सुबह, दोपहर के ३ बजे, स्कूल से आकर सीधे ट्रांजिस्टर ऑन कर के मैंने अपनी माँ की नींद खराब करने का पाप तो कर ही दिया था. माँ से बचने के लिए बाहर कॉलोनी के ग्राउंड में जा बैठा. ग्राउंड में बैठने के फायदे थे. जब मैच के हाल के हिसाब से आनंद, या गुस्सा व्यक्त करने की नौबत आती, तब कुछ नए नए सीखे शब्दों का भरपूर इस्तमाल किया जा सकता, बिना किसी के डर के.

सुनील गावस्कर और गुलाम परकार तो पहले ही पवेलियन लौट चुके थे, और लार्ड ऑफ़ लॉर्ड्स वेंगसरकर के साथ रवि शास्त्री बैटिंग कर रहे थे. उन्होंने करीब ६० रन जोड़ लिए थे. शास्त्रीजी सुबह का खेल के शुरू होते ही, “ट्रेसर बुलेट” की तरह पवेलियन लौट गए. १९७९ में वेंगसरकर के साथ मैच बचानेवाले गुंडप्पा विश्वनाथ आए, लेकिन ६ गेंदों का सामना कर के वे भी लौट गए. अब मेरे ११ साल वाली जुबान पर भाषा कैबरे करने लगी थी. उस उम्र में भी मेरा गुस्सा अब जुबान के रास्ते फूटने लगा. बिल्डिंग के बगल वाले रास्ते से आने जाने वाले लोग एक बच्चे के मूंह से ऐसे शब्द सुनकर चौंकते, मुझे आँखे दिखाते, और चल देते. यशपाल शर्मा आए, जैसे लॉर्ड्स पर घर बनाकर आये हो. वे ३ घंटों तक आउट नहीं हुए, ३७ रन बनाए, और वेंगसरकर के साथ डटे रहे.

अगर दिलीप वेंगसरकर की कलात्मक बल्लेबाज़ी उस दिन किसी सुन्दर पेंटिंग की तरह थी, तो यशपाल की पारी उस पेंटिंग का कैनवास थी. इस इनिंग्स की रेसिपी कुछ १९७९ की ही तरह थी. अगर गेंद आगे पिच की गई हो, तो उसे बड़ी ही नज़ाक़त के साथ वेंगसरकर ड्राइव कर देते जैसी कोई सुन्दर लड़की किसी को बलखाते नाज़ुक हाथों से रास्ता दिखा रही हो, और अगर गेंद छोटी हो, तो उसे निर्ममता के साथ कट या पुल कर देते, जैसे कोई आरी से किसी की गर्दन काट रहा हो. जब दिलीप आउट हुए, तब भारत का स्कोर २५२ था, और दिलीप के १५७ रन थे. उनका उस समय का वह उच्चतम टेस्ट स्कोर था. करीब साढ़े पांच घंटे क्रीज़ पर डटे रहकर वेंगसरकर ने २१ चौके लगाए थे. इस पारी के बाद ही क्रिकेट पंडितों ने दिलीप की तुलना ग्रेग चैपल के साथ करनी शुरू की.

हालांकि यह शानदार पारी भारत की पराजय न टाल सकी, लेकिन फॉलो ऑन करीब करीब बचा लिया था दिलीप वेंगसरकर ने. उनकी विकेट गिरने पर उतरे बल्लेबाज़ कपिल देव ने T२० स्टाइल में ५५ गेंदों पर १३ चौकों और ३ छक्कों की आतिशबाजी कर के भारत को न ही केवल ३०५ के पार पहुँचाया, बल्कि ६५ रनों की बढ़त भी दिला दी, जो मैच जीतने या बचाने के काम न आ सकी.
वेंगसरकर की यह पारी उनकी सर्वश्रेष्ठ पारीयों में से है, ऐसा कई क्रिकेट पंडितों का मानना है. लेकिन वेंगसरकर खुद इस पारी से बिलकुल खुश नहीं थे. अपने उच्चतम स्कोर से बराबरी कर लेने के बावजूद दिलीप अपनी इस पारी के बारे ज्यादा बात नहीं करना चाहते. वे कहते है, जिस पारी ने मेरी टीम को हारने से नहीं बचाया, उसे बखानकर क्या फायदा? वे बड़े ही कड़े प्रतिस्पर्धी थे, और टीम की जगह उनके मन में व्यक्तिगत कीर्तिमानों से बहुत ऊंची थी.

चार साल बाद वेंगसरकर ने फिर लॉर्ड्स पर शतक जमाकर अपनी टीम को जीत दिलाई, उस पारी के बारे अगली किश्त में.
क्रमशः
Special thanks to Sanjeev Sathe, who is an avid cricket fan and a dear friend of ours for contributing this wonderful article.

Lord of Lords- Part 1

भारतीय बल्लेबाज आम तौर पर इंग्लैंड में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं. एशिया के सूखे विकेट्स पर रनों के ढेर खड़ा करने वाले भारतीय बल्लेबाज़ इंग्लैंड में स्विंग और सीम होनेवाली गेंदों पर अक्सर चकमा खा जाते हैं.लेकिन कुछ भारतीय बल्लेबाज़ हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन इंग्लैंड के खिलाफ इंग्लैंड में ही किये हैं. मसलन, विजय मर्चंट, सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, और…दिलीप वेंगसरकर. वेंगसरकर का नाम सुनील गावस्कर और विश्वनाथ की श्रेणी में नहीं लिया जाता, लेकिन जानकार क्रिकेट प्रेमियों के लिए उन की बल्लेबाज़ी देखने से ज्यादा मनभावन दृश्य कोई न था. अपराइट खड़ा स्टांस, एकदम सीधे बल्ले से खेले गए बेहतरीन ड्राइव्स और छोटी गेंदों पर कट और पुल के निर्मम प्रहार. उन की बल्लेबाजी ग्रेग चैपल की याद दिलाती थी. १९७९ में, दिलीप वेंगसरकर पहली बार लॉर्ड्स पर खेल रहे थे, और पहली पारी में बिना कोई रन बनाये आउट हो गए थे. अकेले उन ही का प्रदर्शन खराब नहीं था, भारत की पहली पारी ही ९६ रनों में सिमट गई थी.

Dilip Vengsarkar
Dilip Vengsarkar

सन १९७४ में भारत लॉर्ड्स पर ४२ रन में आल आउट हुआ था, और बुरी तरह हारा था, उस समय के जख्म फिर से हरे होने लगे थे. भारत के ९६ के जवाब में इंग्लैंड ने ४१९ का विशाल स्कोर खडा किया, और फिर से भारत की इनिंग्स डिफिट होने के असार नज़र आने लगे. दूसरी पारी में पहले विकेट के लिए गावस्कर और चौहान ने ७९ रन जोड़े, और चौहान आउट हो गए. गावस्कर के साथ पारी सम्हालने के लिए उतरे दिलीप वेंगसरकर. लेकिन और बीस रन बनने पर गावस्कर भी आउट होकर पैवेलियन लौट गए. अब साले की जगह लेने आया जीजा. गुंडप्पा विश्वनाथ बल्लेबाजी के लिए आ गए. अब भी भारत २२४ रनों से पीछे था, और शेष भारतीय बल्लेबाज़ अच्छे फॉर्म में नहीं थे. विश्वनाथ और वेंगसरकर पर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी, और उन्हें यह सुनिश्चित करना था, कि भारत अगर यह मैच जीत नहीं सकता, तो कम से कम हार का सामना तो नहीं करना पड़े. अगले छह घंटों तक ये दोनों क्रीज़ पर डेट रहें, और उन्होंने २१९ रनों की लम्बी साझेदारी निभायी. हलाकि दोनों भी मैच के अंत तक नाबाद नहीं रहे, लेकिन जब ये दोनों आउट हुए, तब तक उन्होंने जीत को इंग्लैंड की पहुँच से बाहर कर दिया था, और अपने देश के लिए मैच बचा लिया था. दिलीप वेंगसरकर मैन ऑफ़ द मैच बन गए. यह बात तो है, कि मैच बचने में विश्वनाथ का भी उतना ही योगदान था जितना वेंगसरकर का, लेकिन मैन ऑफ़ द मैच एक ही बन सकता था. जब यह इनाम घोषित हुआ, तब वेंगसरकर नहा रहे थे, और उन की जगह पर उन की और से मंच पर जाकर विश्वनाथ ने अवार्ड स्वीकारा. यह है पोएटिक जस्टिस का नमूना. लेकिन इस पारी से वेंगसरकर के उस कीर्तिमान की शुरुआत हुई, जो न ब्रैडमन, गावस्कर, सोबर्स, रिचर्ड्स, चैपल, तेंदुलकर, द्रविड़, पॉन्टिंग, कैलिस आदियों को भी कभी हासिल नहीं हुआ.

क्रमशः

Special thanks to Sanjeev Sathe, who is an avid cricket fan and a dear friend of ours for contributing this wonderful article.

Journey to MCA Pune MI VsCSK

Here’s have a look at the journey full of fun and entertainment of the cricket fans to the MCA stadium Pune to watch the battle between the 2 giants Mumbai Indians Vs CSK. Its ShamsnWags’s journey along with Arpit Awasthi and Gavin.
It was a beautiful journey from Mumbai to Pune.

The squad for Mumbai Indians was :
Ishan Kishan (wk), Rohit Sharma (c), Suryakumar Yadav, Evin Lewis, Kieron Pollard, Krunal Pandya, Hardik Pandya, Akila Dananjaya, Mayank Markande, Jasprit Bumrah, Mustafizur Rahman, Rahul Chahar, Saurabh Tiwary, Ben Cutting, Pradeep Sangwan, Jean-Paul Duminy, Mitchell McClenaghan, Tajinder Singh, Sharad Lumba, Siddhesh Lad, Aditya Tare, Anukul Roy, Mohsin Khan, MD Nidheesh, and Adam Milne

CSK Squad:
MS Dhoni (c & wk), Shane Watson, Ambati Rayudu, Sam Billings, Ravindra Jadeja, Dwayne Bravo, Deepak Chahar, Harbhajan Singh, Imran Tahir, Shardul Thakur, Faf du Plessis, KM Asif, Kanishk Seth, Dhruv Shorey, Murali Vijay, Mark Wood, Kshitiz Sharma, Monu Kumar, Chaitanya Bishnoi, Karn Sharma, N Jagadeesan, and David Willey.

4 Times World Champions!

Victorious U-19 Team India
World Champions

A successful person Is the one who has got determination, aspiration, who believes in hard work and discipline. An individual success can well be translated into a team success. The future of Team India, presently the World Champions, is secured with the strong wall- Rahul Sharad Dravid.
Not taking anything away from the U-19 boys, it’s the guidance of Dravid that has seen Team India win the Under -19 World Cup. He was always the captain’s Go-to man. Donned Wicket keeper’s gloves when the captain required, opened the innings, played a sheet anchors role in the middle order, rolled his arms- were some of role that he has often played.
Commitment towards cricket during his playing days was so addictive and irresistible that he carried on the mantle into coaching the Junior team. No reward could have been better than a World Cup Victory by his Under- 19 boys!
4 times World Champion-Under 19 Team India. This was an unbeaten performance as India didn’t lose a single match. Ironically, India played its first match and last match Australia. This tournament has seen India produce some wonderful players. To name a few- Captain Prithvi Shaw, Shubman Gill, Manjot Kalra, Nagarkoti, Ishan Porel & Shivam Mavi . This victory will remain in the memories for a long time to come. Some of them can walk into the senior team anytime.
Prithvi Shaw marshaled his troops very well. He missed on his century by 6 runs in the first match against Australia. Had he stayed on to the wicket, he could have scored a century in the Finals. Shubman Gill scored a brilliant unbeaten century against Pakistan in the semi Finals. A brilliant bowling spell by Ishan Porel made sure that India Won by a whopping margin of 203 runs. Manjot Kalra made the most of it when it mattered. He sealed the victory with an unbeaten 101 runs. Kamlesh Nagarkoti has been sensational in the U-19 Circuit. He crossed almost 150 Kmph in the speed gun in one of the match.
A big congratulation to the Under-19 Team India and Big Salute to Rahul Dravid.