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Lord of Lords- Part 1

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भारतीय बल्लेबाज आम तौर पर इंग्लैंड में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं. एशिया के सूखे विकेट्स पर रनों के ढेर खड़ा करने वाले भारतीय बल्लेबाज़ इंग्लैंड में स्विंग और सीम होनेवाली गेंदों पर अक्सर चकमा खा जाते हैं.लेकिन कुछ भारतीय बल्लेबाज़ हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन प्रदर्शन इंग्लैंड के खिलाफ इंग्लैंड में ही किये हैं. मसलन, विजय मर्चंट, सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली, और…दिलीप वेंगसरकर. वेंगसरकर का नाम सुनील गावस्कर और विश्वनाथ की श्रेणी में नहीं लिया जाता, लेकिन जानकार क्रिकेट प्रेमियों के लिए उन की बल्लेबाज़ी देखने से ज्यादा मनभावन दृश्य कोई न था. अपराइट खड़ा स्टांस, एकदम सीधे बल्ले से खेले गए बेहतरीन ड्राइव्स और छोटी गेंदों पर कट और पुल के निर्मम प्रहार. उन की बल्लेबाजी ग्रेग चैपल की याद दिलाती थी. १९७९ में, दिलीप वेंगसरकर पहली बार लॉर्ड्स पर खेल रहे थे, और पहली पारी में बिना कोई रन बनाये आउट हो गए थे. अकेले उन ही का प्रदर्शन खराब नहीं था, भारत की पहली पारी ही ९६ रनों में सिमट गई थी.

Dilip Vengsarkar
Dilip Vengsarkar

सन १९७४ में भारत लॉर्ड्स पर ४२ रन में आल आउट हुआ था, और बुरी तरह हारा था, उस समय के जख्म फिर से हरे होने लगे थे. भारत के ९६ के जवाब में इंग्लैंड ने ४१९ का विशाल स्कोर खडा किया, और फिर से भारत की इनिंग्स डिफिट होने के असार नज़र आने लगे. दूसरी पारी में पहले विकेट के लिए गावस्कर और चौहान ने ७९ रन जोड़े, और चौहान आउट हो गए. गावस्कर के साथ पारी सम्हालने के लिए उतरे दिलीप वेंगसरकर. लेकिन और बीस रन बनने पर गावस्कर भी आउट होकर पैवेलियन लौट गए. अब साले की जगह लेने आया जीजा. गुंडप्पा विश्वनाथ बल्लेबाजी के लिए आ गए. अब भी भारत २२४ रनों से पीछे था, और शेष भारतीय बल्लेबाज़ अच्छे फॉर्म में नहीं थे. विश्वनाथ और वेंगसरकर पर बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी थी, और उन्हें यह सुनिश्चित करना था, कि भारत अगर यह मैच जीत नहीं सकता, तो कम से कम हार का सामना तो नहीं करना पड़े. अगले छह घंटों तक ये दोनों क्रीज़ पर डेट रहें, और उन्होंने २१९ रनों की लम्बी साझेदारी निभायी. हलाकि दोनों भी मैच के अंत तक नाबाद नहीं रहे, लेकिन जब ये दोनों आउट हुए, तब तक उन्होंने जीत को इंग्लैंड की पहुँच से बाहर कर दिया था, और अपने देश के लिए मैच बचा लिया था. दिलीप वेंगसरकर मैन ऑफ़ द मैच बन गए. यह बात तो है, कि मैच बचने में विश्वनाथ का भी उतना ही योगदान था जितना वेंगसरकर का, लेकिन मैन ऑफ़ द मैच एक ही बन सकता था. जब यह इनाम घोषित हुआ, तब वेंगसरकर नहा रहे थे, और उन की जगह पर उन की और से मंच पर जाकर विश्वनाथ ने अवार्ड स्वीकारा. यह है पोएटिक जस्टिस का नमूना. लेकिन इस पारी से वेंगसरकर के उस कीर्तिमान की शुरुआत हुई, जो न ब्रैडमन, गावस्कर, सोबर्स, रिचर्ड्स, चैपल, तेंदुलकर, द्रविड़, पॉन्टिंग, कैलिस आदियों को भी कभी हासिल नहीं हुआ.

क्रमशः

Special thanks to Sanjeev Sathe, who is an avid cricket fan and a dear friend of ours for contributing this wonderful article.

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